- वाराणसी: बच्चों से खाद्यान्न उठवाने पर प्रधानाध्यापक निलंबित, 17 शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकी गई
दुर्गेश राय : चीफ स्टेट ब्यूरो : यूपी : वाराणसी। वाराणसी जिले के चिरईगांव ब्लॉक स्थित कंपोजिट विद्यालय पचरांव में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहां विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्कूली बच्चों से 50 किलो वजन वाली खाद्यान्न की बोरियां उठवाईं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया और मामले की जांच के आदेश दिए गए।
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वायरल वीडियो और फोटो में देखा जा सकता है कि आठवीं कक्षा के छात्र स्कूल परिसर में भारी भरकम अनाज की बोरियां उठा रहे हैं। यह दृश्य देखकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने नाराजगी जताई और शिक्षा विभाग से इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बच्चों के साथ मजदूरों जैसा व्यवहार किया जाता था, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
जांच और प्रशासन की कार्रवाई
फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अरविंद कुमार पाठक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच में पुष्टि होने के बाद प्रधानाध्यापक छोटू राम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
चिरईगांव के कंपोजिट विद्यालय पचरांव में छात्रों से 50 किलो की खाद्यान्न बोरियां उठवाने का मामला सामने आया, वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने की कड़ी कार्रवाई
इसके अलावा, विद्यालय में कार्यरत 17 सहायक अध्यापकों की एक वेतन वृद्धि रोक दी गई, जबकि दो अनुदेशकों और एक शिक्षामित्र का मानदेय भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
BSA ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों से इस तरह का श्रम कराना पूरी तरह अनुचित और अवैध है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग इस प्रकार की घटनाओं को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
ग्रामीणों का विरोध और छात्रों की स्थिति
घटना के सामने आने के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनका कहना है कि स्कूल के शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाई के अलावा अन्य कामों में लगाया जा रहा था, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही थी।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक स्कूल में हर महीने बच्चों से खाद्यान्न उठवाते थे। बच्चों से यह काम करवाने का कारण यह बताया जा रहा है कि विद्यालय में कोई कर्मचारी नहीं था, जो इस कार्य को कर सके।
छात्रों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने स्वीकार किया कि प्रधानाध्यापक के कहने पर वे यह कार्य कर रहे थे। हालांकि, डर के कारण कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था।
शिक्षा विभाग की सख्त हिदायत
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बच्चों से किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षणिक कार्य न कराया जाए। अगर किसी विद्यालय में इस प्रकार की घटना दोबारा होती है, तो संबंधित प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

BSA डॉ. अरविंद कुमार पाठक ने कहा, “विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा हमारी प्राथमिकता है। किसी भी कीमत पर बच्चों से श्रम नहीं करवाया जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
गौरतलब हो कि यह घटना बच्चों के अधिकारों और शिक्षा प्रणाली की लापरवाही को उजागर करती है। बच्चों को शिक्षा का अधिकार है और उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। विद्यालयों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कार्यभार न डाला जाए, जिससे उनकी पढ़ाई और शारीरिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़े।
इस मामले ने न केवल शिक्षा विभाग को सतर्क किया है बल्कि अभिभावकों को भी जागरूक होने का संदेश दिया है कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई और स्कूल में हो रही गतिविधियों पर नजर रखें।
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