- प्रयागराज में बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिया 10-10 लाख मुआवजा देने का आदेश
- अवैध कार्रवाई कर घर गिराने पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
विजय कुमार पटेल : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में 2021 में हुए बुलडोजर एक्शन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (PDA) को आदेश दिया है कि वे 5 याचिकाकर्ताओं को 10-10 लाख रुपये मुआवजा दें। यह मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर दिया जाएगा।
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अवैध करार दिया गया बुलडोजर एक्शन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर मकान गिराना पूरी तरह से गलत था और इसे अवैध माना गया है। न्यायालय ने अधिकारियों की इस कार्रवाई को अमानवीय करार दिया और कहा कि सरकारों को बिना उचित प्रक्रिया अपनाए घरों को गिराने से बचना चाहिए।
‘राइट टू शेल्टर’ का हवाला
सुनवाई के दौरान जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने स्पष्ट किया कि देश में इस तरह से रिहायशी घरों को नहीं गिराया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह मामला ‘राइट टू शेल्टर’ (आवास का अधिकार) का हनन है, और इस तरह की अवैध कार्रवाई से आम जनता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
मामला क्यों उठा?
2021 में प्रयागराज प्रशासन ने गैंगस्टर अतीक अहमद की संपत्ति समझकर वकील जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और तीन अन्य व्यक्तियों के मकान गिरा दिए थे। इन प्रभावित लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया।
‘बच्ची की झोपड़ी से किताबें निकालने का वीडियो झकझोर देने वाला’
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो का हवाला दिया, जिसमें एक बच्ची बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान अपनी झोपड़ी से किताबें लेकर भागती नजर आ रही थी। अदालत ने कहा, ‘यह हमारी अंतरात्मा को झकझोर देता है। राइट टू शेल्टर और उचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है।’
भविष्य में अवैध बुलडोजर कार्रवाई पर रोक का संकेत
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए यह फैसला बेहद जरूरी था।यह निर्देश सरकारों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे उचित प्रक्रिया के बिना इस तरह की कार्रवाई न करें।
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