- 29 साल बाद आया फैसला: यूपी आयुर्वेद घोटाले में दोषी अधिकारी को 3 साल की सजा
- लखनऊ: करोड़ों के घोटाले पर कोर्ट का कड़ा रुख
आयुष पाण्डेय : लखनऊ। लखनऊ में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित यूपी आयुर्वेद घोटाले पर आखिरकार 29 साल बाद फैसला आ गया। CBI की विशेष अदालत ने इस घोटाले में दोषी अधिकारी को 3 साल की सजा और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला 90 के दशक से चल रहा था, जब सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया था।
जानिए क्या है पूरा मामला?

इस घोटाला की पहचान लखनऊ आयुर्वेद घोटाला (1996) के रूप में किया जाता है। इस घोटाले में, तत्कालीन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी अनुदान पत्र जारी करके बिना आवश्यक प्रक्रिया के दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद की, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। लंबी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद, बीते 19 मार्च 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत ने बांदा के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुर्वेद और यूनानी अधिकारी (RAUO) डॉ. रमेश चंद्र शर्मा को तीन साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने से धन निकाला और दवाओं की खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया। मामला सामने आने के बाद इसकी जांच CBI को सौंपी गई थी।
कई सालों तक खिंचा मामला, अब आया फैसला
इस मामले की सुनवाई करीब तीन दशकों तक चली, जिसमें गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने दोषी अधिकारी को तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही, कोर्ट ने दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
CBI कोर्ट के फैसले की अहम बातें:
✔ 29 साल बाद आया फैसला
✔ दोषी अधिकारी को 3 साल की सजा
✔ 1 लाख रुपये का जुर्माना
✔ करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मामला
सरकार और जांच एजेंसियों पर उठे सवाल

इस घोटाले में फैसला आने में तीन दशक का वक्त लगना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। भ्रष्टाचार के इतने बड़े मामले में इतनी देरी से न्याय मिलने पर लोग नाराजगी जता रहे हैं।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी घोटालों में जांच की धीमी प्रक्रिया के कारण ही दोषियों को सजा देने में इतना वक्त लग जाता है। इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई को तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
फैसले के बाद यह देखना होगा कि दोषी अधिकारी ऊपरी अदालत में अपील करता है या नहीं। इसके अलावा, यह मामला अन्य भ्रष्टाचार के मामलों के लिए नजीर बनेगा, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों को जल्द निपटाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
पहले भी हो चुका है घोटाला
मुरादाबाद आयुर्वेद घोटाला: इस मामले में, आयुर्वेद विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जय करण समेत तीन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने चिकित्सा उपकरणों और दवाइयों की खरीद में अनियमितताएं कीं। सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में इन अधिकारियों को तीन साल की सजा और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।