लम्पी वायरस गौवंश के लिए बना खतरा, राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने डी एम से तत्काल कार्रवाई की मांग की
गौवंश में लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के संक्रमण की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने डी एम से गौवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।जिलाधिकारी बहराइच एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से अपील करते हुए कहा है कि गौवंश के स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, टीकाकरण एवं निगरानी व्यवस्था अविलम्ब सही ढंग से की जाए

रिपोर्ट : गोरखनाथ दूवे : यूपी : बहराइच : गौवंश में लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के संक्रमण की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने डी एम से गौवंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।जिलाधिकारी बहराइच एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से अपील करते हुए कहा है कि गौवंश के स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, टीकाकरण एवं निगरानी व्यवस्था अविलम्ब सही ढंग से की जाए
लम्पी वायरस गौवंश के लिए बना खतरा, राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद ने डी एम से तत्काल कार्रवाई की मांग की
राष्ट्रीय हिन्दू रक्षा परिषद के जिला उपाध्यक्ष संतोष सनातनी के नेतृत्व में गौ रक्षक सिद्धनाथ सनातनी, अवधेश सनातनी एवं प्रमोद सनातनी ने गौवंश की सुरक्षा का विषय उठाते हुए प्रशासन से इस दिशा में गंभीरता से कार्यवाई करने की मांग की है।
परिषद का कहना है कि गौवंश ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालकों की आजीविका और समाज की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए समय रहते सतर्कता,उचित उपचार और पशु चिकित्सा विभाग की सक्रियता आवश्यक है। यदि किसी क्षेत्र में लम्पी रोग के लक्षण सामने आते हैं, तो संबंधित विभाग द्वारा तत्काल जांच कराकर आवश्यक उपचार एवं रोकथाम के कदम उठाए जाने चाहिए।
परिषद की प्रमुख मांगें
1- गौवंश का टीकाकरण: पशु चिकित्सा विभाग के माध्यम से निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान चलाया जाए।
2- विशेष पशु चिकित्सा शिविर: ग्रामीण क्षेत्रों, गौशालाओं और गो-आश्रय स्थलों पर आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा शिविर लगाए जाएं।
3- बीमार पशुओं का तत्काल उपचार: लम्पी रोग के लक्षण वाले पशुओं की शीघ्र जांच कराकर उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए।
4- दवाइयों की उपलब्धता: सरकारी पशु चिकित्सालयों में आवश्यक दवाइयां और उपचार संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
5- संक्रमित पशुओं की देखभाल: पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार संक्रमित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखकर उनकी समुचित देखभाल की व्यवस्था की जाए।
6- गौशालाओं में विशेष निगरानी: गो-आश्रय स्थलों में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त चारे और पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
7- जागरूकता अभियान : ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को रोग के लक्षण, बचाव के उपाय और समय पर पशु चिकित्सक से संपर्क करने के संबंध में जागरूक किया जाए।
8- त्वरित सहायता व्यवस्था: बीमार एवं बेसहारा गौवंश की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग द्वारा समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।

